राहुल गांधी ने यूपी में किया अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान, जानिए इसके पीछे की उनकी रणनीति

mohit jha Jan 12, 2019

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मायावती और अखिलेश के महागठबंधन में साथ आने से मना कर दिया है. राहुल गांधी ने जब से हिंदी हार्टलैंड में बीजेपी को हराया है तभी से उनके हौसले बुलंद हैं. लेकिन यूपी में महागठबंधन के साथ ना आने का ऐलान करके राहुल गांधी ने बहुत बड़ा दांव चला है.और ऐसा उन्होंने एक सोची समझी रणनीति के तहत किया है.

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कर्नाटक विधानसभा चुनावों के बाद से ही कांग्रेस के शीर्ष नेता मायावती और अखिलेश के साथ लगातार संपर्क साधे हुए थे. और इन नेताओं की महागठबंधन को लेकर बातचीत भी चल रही थी. लेकिन साल बदलते ही कांग्रेस अध्यक्ष के सुर बदल गए. ऐसा क्यों हुआ यह किसी को समझ नहीं आया.

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दरअसल कांग्रेस यूपी में उसी रणनीति पर काम कर रही है जिस पर अमल करके साल 2014 में बीजेपी ने अपना परचम लहराया था. अगर कांग्रेस यूपी में बुआ बबुआ के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ते तो उसे सीटें कम मिलती लेकिन उसके सिटी जीतने के चांसेस ज्यादा होते. ऐसी स्थिति में देश में एक मैसेज जाता कि कांग्रेस अभी भी बीजेपी का विकल्प नहीं बन पाई है. और कांग्रेस अध्यक्ष की सारी कोशिशों पर पानी फिर जाता. कांग्रेस अध्यक्ष बीते दिनों से लगातार प्रधानमंत्री पर हमला बोल रहे हैं. और ऐसा करके यह दिखाना चाहते हैं वह और कांग्रेस एक विकल्प है और मजबूत विकल्प है.

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यूपी के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की करारी हार के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को राहुल गांधी फुटकर आंख नहीं सुहा रहे थे.वह किसी भी कीमत पर कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करना चाहते थे. लेकिन राज्यों में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद अखिलेश के तेवर में भी नरमी आई. महागठबंधन में कांग्रेस को 20 सीटें देने की बातें होने लगी. कांग्रेस अध्यक्ष का मिजाज टटोलने के लिए बीएसपी के नेताओं ने महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर फर्जी हवा भी उड़ाई. लेकिन राहुल गांधी तो कुछ और ही सोच कर बैठे थे और उन्होंने यूपी में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया.

यूपी में बुआ बबुआ के साथ आने के बाद उनकी पार्टी में अब बगावती सुर भी उठे लगेंगे. उसका कारण होगा वह नेता जो टिकट की आस लगाकर बैठे होंगे और उनको टिकट नहीं मिलेगा. ऐसी स्थिति में दोनों पार्टी के कई नेता अपना पाला भी बदल सकते हैं कांग्रेस इन्हीं नेताओं पर अपनी नजरें जमाई हुई है और अगर यह नेता आम चुनावों से पहले कांग्रेस का दामन थाम ते हैं तो कांग्रेस को इसका फायदा भी होगा.

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साथ ही कांग्रेस अपनी सॉफ्ट हिंदुत्व वाली इमेज को लेकर भी आगे चल रही है और ऐसा करके वह ब्राह्मणों को साधने की कोशिश कर रही है उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की कमान खुद सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका वाड्रा ने संभाल रखी हैं. प्रियंका लगातार यूपी के कद्दावर ब्राह्मण नेताओं से संपर्क में है और उन्हें अपनी पार्टी कांग्रेस में शामिल कराने के लिए काम भी कर रहे हैं. साथी कांग्रेस का मुसलमान वोटर भी अब उसके साथ आ सकता है. यानी कांग्रेस बीएम समीकरण पर काम कर रही है बीमा ने ब्राह्मण ने मुसलमान और अगर उसका यह दाव सही रहा और कॉन्ग्रेस 20 सीटों से ज्यादा जीत लेती है तो यूपी में उसके लिए बल्ले-बल्ले होगी.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन ज्यादा अच्छा नहीं रहा है असद करीब 10 साल पहले उसके यहां पर 20 सीट ही हुआ करती थी और अगर 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस 20 सीटों से ज्यादा देती है तो उसके लिए फायदा होगा और अगर चुनाव के बाद फिर वही 2009 की स्थिति बनती है तो ऐसी स्थिति में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मायावती और अखिलेश को दबाव में रख पाएंगे.

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