गंगा दशहरा से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और इसका महत्व !

Nayantara Jun 23, 2018

गंगा दशहरा हिन्दूओं का देवी गंगा को समर्पित एक बड़ा पर्व है। इस पर्व को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इसे गंगावतारण भी कहा जाता है। जिसका अर्थ होता है गंगा का अवतार। आइए जानते हैं क्या है इस दिन का खास महत्व और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं। 

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गंगा दशहरा का महत्व

हिन्दू पुराणों के अनुसार भागीरथ को अपने पूर्वजों की अस्तियों को विसर्जित करने के लिए एक निर्मल जल की अवश्यकता थी। जिसके लिए उन्होंने गंगा मां की कठोर तपस्या की। लेकिन गंगा का बहाव तेज होने के कारण वह भागीरथ की इच्छा पूरी नहीं कर पा रही थीं। जिसके बाद उन्होंने भागीरथ से कहा कि अगर भगवान शिव उन्हें अपनी जटाओं में भरकर पृथ्वी पर उनका धारा प्रवाह कर दें तो उसकी इच्छा पूरी हो सकती है। 

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मां गंगा के कथन अनुसार भागीरथ ने शिव की कठोर तपस्या की, जिसके फलस्वरूप मां गंगा शिव के कमंडल में समा गई। जिसके बाद ब्रह्म जी ने शिव की जटाओं में से गंगा जी को प्रवाहित कर दिया। जिसके बाद शिव ने गंगा की एक धारा पृथ्वी की ओर प्रवाहित कर दी जिसमें भागीरथ ने अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जिन किया।  

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हिन्दू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिस दिन मां गंगा का धरती में आगमन हुआ वह दिन गंगा दशहरा कहलाया। इस दिन भक्त मां गंगा के जल में स्नान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि गंगा के जल में स्नान करने से व्यक्ति के सारे पापा नष्ट होकर वो निरोग हो जाता है। इस खास दिन प्रात: काल सुबह उठकर स्नान करने का खास महत्व बताया जाता है। 

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