19वीं शताब्दी के जानलेवा और खतरनाक फैशन

Aka Raj Jul 9, 2018

चौपाइन्स

चौपाइ ऐसे सैंडल्स थे, जिनके सोल काफी ऊंचे होते थे और इनको बैलेंस करना बहुत मुश्किल होता था। 15वीं से 17वीं शताब्दी तक यह जूते काफी प्रसिद्ध हुए।

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महिलाएं इतने ऊंचे जूते इसलिए पहनती थी ताकि उनकी पोशाक कीचड़ या मिट्टी से बची रहे। कई बार यह जूते इतने ऊंचे होते थे कि पहनने वालों को अपने साथ सेवकों को रखना पड़ता था।

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इन सेवकों की सहायता से ही महिलाएं चलफिर पाती थी। चौपाइन जितना ऊंचा होता था पहनने वाली महिला का रुतबा भी उतना ऊंचा समझा जाता था।

फुट बाइंडिंग

हाई हील्स पहनना बहुत ही मुश्किल और दर्द भरा होता है। इसमें पैर काफी हद तक मुड़ जाता है। आप कहेंगे कि यह कितना मुश्किल काम है लेकिन चाइना के इस फैशन के बारे में जानने के बाद आपकी राय बदल सकती है।

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चाइना में फुट बाइंडिंग एक ऐसा फैशन था, जिसमे लड़कियों के पैरों को बचपन से ही बांधकर रखा जाता था ताकि उनके पैर 3 इंच से ज्यादा बड़े ना हो सके।

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चाइनीस लोग इस ट्रेडिशन को सुंदरता और अमीरी की निशानी मानते थे। उस समय ऐसे पैरों को स्टेटस सिंबल के तौर पर देखा जाता था। सामान्य पैरों वाले इंसान को नीचे तबके का माना जाता था। इस अजीब फैशन के नतीजे खतरनाक होते थे। महिलाओं के पैरों की हड्डियां टूट जाती थी और वयस्क होने पर वह चल भी नहीं पाती थी। 1912 में इस फैशन को बैन कर दिया गया है।

कोर्सेट्स

दुनिया में कोर्सेट्स का चलन सदियों से रहा है। कई देशों में यह फैशन आज भी देखने को मिल जाता है।

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आपके लिए ऐसे पहनना काफी खतरनाक हो सकता है क्योंकि कोर्सेट्स को पहनने के लिए कमर को बहुत ज्यादा कसना पड़ता है, जिससे अंदरूनी अंगों को काफी क्षति पहुंचती है।

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इससे सांस लेने में दिक्कत होती है और ऑक्सीजन सरकुलेशन की कमी की वजह से आप बेहोश भी हो सकते हैं। कुछ कैसेस में यह ड्रेस मौत की वजह भी बन चुकी है।

अार्सनिक ड्रेस

19वीं शताब्दी की शुरुआत में बोटल ग्रीन कलर के गाउन बहुत प्रचलित हुए। महिलाओं में इन्हें पहनने का बहुत क्रेज था। यह इतने खतरनाक थे कि इनसे जान भी जा सकती थी।

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दरअसल उस समय कपड़ों को जिस रंग से रंगा जाता था, उसमें "अार्सनिक" नाम का एक जहरीला पदार्थ मिला होता था जिससे ड्रेस को बनाने वाले और पहनने वाले दोनों की मौत हो जाती थी।

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अार्सनिक को "पेरिस ग्रीन" के नाम से भी जाना जाता था। अार्सनिक के खतरनाक परिणामों को देखते हुए डॉक्टर की सलाह के बाद इस पर बैन लगा दिया गया।

नैक रिंग्स

बर्मा की इन महिलाओं को "जिराफ वूमेन" के नाम से जाना जाता है। यह महिलाएं आज भी यह रिंग्स अपने गले में पहनती हैं, जिस कारण उनकी गर्दने काफी लंबी हो जाती हैं। इनकी इन लंबी गर्दनों को सुंदरता का प्रतीक माना जाता है। शुरुआत में इस ट्रेडिशन को महिलाओं ने अपनी सुरक्षा के लिए अपनाया था।

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वह इन रिंग्स को इसलिए पहनती थी ताकि वे शेर या बाघ के काटने और दूसरे कबीलों द्वारा अपहरण किए जाने से बच सकें। बाद में इस बचाव ने एक परंपरा का रूप ले लिया। इस फैशन के कारण महिलाओं को मांसपेशियों में तकलीफ और त्वचा संबंधित कई बीमारियां हो गई।

टूथ लैक्यूरिंग

19वी शताब्दी में जापान में दांतो को रंगने का फैशन जोरों पर था। महिलाएं आयरन और ब्लैक डाई से बनाए ड्रिंक पीती थी, जिससे उनके दांत काले हो जाते थे।

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उस समय काले दांतो को अच्छे स्वास्थ्य और सुंदरता की निशानी माना जाता था। 1870 में इस पर रोक लगा दी गई।

होबल स्कर्ट्स

बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में फ्रेंच डिजाइनर "पॉल पोइरेट" ने पहला होबल स्कर्ट्स बनाया। यह स्कर्ट काफी लंबी और टाइट होती थी।

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इसे पहनने के बाद महिलाएं लंबे कदम नहीं रख सकती थी, जिस कारण उन्हें धीरे-धीरे चलना पड़ता था क्योंकि दोनों पैर आपस में लगभग जुड़े हुए होते थे जिससे उनके गिरने का खतरा भी बना रहता था।

क्रीनोलाइन

"क्रीनोलाइन" ऐसी पोशाक थी जो, बड़े-बड़े हुप्स या रिंग्स द्वारा बनाई जाती थी और ज्यादातर ये हुप्स स्टील से बने होते थे। 19वी शताब्दी में महिलाएं इन भारी भरकम हुप्स को अपनी लॉन्ग स्कर्ट के अंदर पहनती थी ताकि स्कर्ट घुमावदार और फूली हुई लगे।

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उस समय क्रीनोलाइन एक आकर्षक पोशाक मानी जाती थी लेकिन यह पहनने में अनकंफर्टेबल होती थी और कभी-कभी खतरनाक भी होती थी।

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इतिहास में ऐसी कई घटनाओं का उल्लेख भी है जिनमें इन स्कर्ट की वजह से महिलाओं को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा। इनको पहनकर चलना बहुत मुश्किल होता था। अगर कोई विपत्ति या आपदा आ जाए तो इन्हें पहनने वाली महिला अपनी जान बचाने के लिए भाग भी नहीं पाती थी।

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