अलविदा 2018- वो सशक्त महिलाएं जिन्होंने साल 2018 में बढ़ाया देश का मान

Stay Updated Dec 24, 2018

साल 2018 महिला खिलाड़ियों के नाम भी रहा। खेलों की दुनिया में भारत की बेटियों ने एक बार फिर अपना झंडा गाड़ा। कई विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में महिला खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन किया। कई नई कहानियां लिखी गईं। गरीबी, उम्र, निराशाओं को पार कर हौसलों के उड़ान की कहानियां। रिक्शा चालक की बेटी स्वप्ना हों, 16 साल की निशानेबाज मनु भाकर या फिर तीन बच्चों की मां बॉक्सर मैरीकॉम सबने एक बार फिर से तिरंगे का मान बढ़ाया है।

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स्वप्ना बर्मन

एशियाई खेलों में हेप्टाथलन का गोल्ड जीतने वाली स्वप्ना बर्मन की शोहरत बुलंदियों पर पहुंच चुकी थी, लेकिन जकार्ता में फिर भी उनसे पदक की उम्मीद नहीं की जा रही थी। लेकिन रिक्शा चालक की इस बेटी के जेहन में कुछ और ही चल रहा था। स्वप्ना ने हेप्टाथलन में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीत कर एक तरफ खुद को साबित किया और दूसरी तरफ देश का गौरव बढ़ाया। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में बेहद खराब आर्थिक स्थितियों में रहने वाली स्वप्ना ने दिखाया कि यदि आपके इरादे मजबूत हों तो कोई कठिनाई आपके रास्ते की बाधा नहीं बन सकती। इस मजूदर की बेटी को कभी वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए नहीं भेजा गया था, लेकिन स्वप्ना ने अपने सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया।

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मैरी कॉम

मैरी कॉम का नाम आज भारत के लिए बॉक्सिंग और गौरव का पर्याय बन चुका है। मैरी कॉम की उम्र 35 साल है और वह तीन बच्चों की मां भी हैं। इस साल मैरी काम ने विश्व मुक्केबाजी में छठी बार स्वर्ण पदक जीत कर नया इतिहास रच दिया। विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने सातवां पदक जीता। मैरी ने 48 किलो वर्ग में यूक्रेन की 22साल की युवा मुक्के बाज हना ओखोता को इकतरफा मुकाबले में 5-0 से हराया। विश्व चैंपियनशिप में छठा गोल्ड मेडल जीतने वाली वह दुनिया की पहली महिला मुक्केबाज हैं। अब मैरी कॉम के विश्व मुक्केबाजी में सात पदक हो गये हैं छह स्वर्ण और एक रजत। इस पदक के साथ ही मैरी कॉम ने क्यूबा के दिग्गज फेलिक्स की बराबरी कर ली है। फेलिक्स सेवोन ने विश्व चैंपियनशिप में सात पदक जीते थे।

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PV सिंधु

साल के अंतिम सप्ताह में खेलों की दुनिया में एक और बड़ी खुशखबरी जुड़ गई। भारतीय शटलर पीवी सिंधु ने 16 दिसंबर को बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल का खिताब जीत लिया। फाइनल में सिंधु ने जापान की नोजुमी ओकुहारा को 21-19, 21-17 से हराकर खिताब अपने नाम किया। सिंधु यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बन गयीं। सिंधु भारतीय पेशेवर बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।

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मनिका बत्रा

महज 23 साल की मनिका बत्रा अपने भाई बहनों में सबसे छोटी हैं। दिल्ली की रहने वाली मनिका ने चार वर्ष की उम्र में टेनिस खेलना शुरू किया था। किशोरावस्था में मनिका को बहुत से मॉडलिंग प्रस्ताव मिले लेकिन उन्होंने अपना पूरा फोकस टेनिस पर बनाए रखा। टेनिस के लिए मनिका ने जीसस एंड मैरी कॉलेज की पढ़ाई भी बीच में ही छोड़ दी। 2011 में मनिका ने चिली ओपन में अंडर 21 में खेलते हुए देश को पहला रजत पदक दिलवाया। 2015 राष्ट्रमंडल खेलों में मनिका ने तीन पदक जीते। 2016 के दक्षिण एशियाई खेलों में मनिका ने तीन स्वर्ण पदक देश के लिए जीते। मनिका के नेतृत्व में भारतीय महिला टीम ने ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित हुए 2018 राष्ट्रमंडल खेलों की टेबल टेनिस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। मनिका ने विश्व की नंबर 4 फेंग तिया नवेई के साथ झोऊ यिहान को भी हराया। 2018 की रैंकिंग के अनुसार मनिका भारत की सर्वोच्त वरीयता प्राप्त और विश्व की 58वीं वरीयता प्राप्त टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं।

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मनु भाकर

हरियाणा के झज्जर की रहने वाली मनु भाकर एक निशानेबाज हैं। 16 वर्षीय मनु भाकर फिलवक्त 11वीं की छात्रा हैं। लेकिन देश के लिए निशानेबाजी में वह अनेक गौरव के पल जुटा चुकी हैँ। इसी वर्ष मनु भाकर ने मैक्सिको के गुआदालाजारा में आईएसएसएफ विश्व कप में गोल्ड मेडल जीत कर देश सिर ऊंचा कर दिया। उन्होंने यह मेडल 10 मीटर एयर पिस्टल में जीता। फाइनल में मनु भाकर ने 237।5अंक अर्जित किये। अब वह ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर गयी हैं।

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पहलवान विनेश फोगाट

23 साल की विनेश हरियाणा से हैं और 'दंगल' वाले फोगाट परिवार से ताल्लुक रखती हैं। भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट ने 18वें एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था। ऐसा कारनामा करने वाली वो भारत की पहली महिला पहलवान बनीं। इससे पहले उन्होंने 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। बचपन से लेकर एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने तक का सफर विनेश के लिए कभी आसान नहीं रहा। महज 10 साल की उम्र में ही जमीन विवाद के चलते उनके पिता राजपाल का मर्डर हो गया था। जो उनके जीवन की सबसे बड़ी दुखद घटना थी। लेकिन विनेश के कभी हार नहीं मानी और हौसले से आगे बढ़ती रहीं।

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